“पुराने लोगों के पास शायद गूगल नहीं था, लेकिन जिंदगी पढ़ने का अनुभव था
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“*पुराने लोगों के पास शायद गूगल नहीं था, लेकिन जिंदगी पढ़ने का अनुभव था,
आज के युवाओं के पास पूरी दुनिया की जानकारी है, मगर उस जानकारी को जीवन की
समझ मे...
1 दिन पहले

आदरणीय डा श्याम गुप्तजी
जवाब देंहटाएंआप को "सुगना फाऊंडेशन मेघलासिया जोधपुर" , "राजपुरोहित समाज", आज का आगरा और "एक ब्लॉग सबका" की तरफ़ से हार्दिक बधाई ! बहुत बहुत बधाई ! बारम्बार बधाई ! मन से बधाई ! अंतर्मन से बधाई ! दिल से बधाई ! तहेदिल से बधाई ! और आपको सफलता की चरम ऊँचाइयों पर ले जाएँ.. ऐसी कामना... सवाई सिंह
आमंत्रण के लिए आभार..!
जवाब देंहटाएंधन्यवाद ...
जवाब देंहटाएंabhar
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