“पुराने लोगों के पास शायद गूगल नहीं था, लेकिन जिंदगी पढ़ने का अनुभव था
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“*पुराने लोगों के पास शायद गूगल नहीं था, लेकिन जिंदगी पढ़ने का अनुभव था,
आज के युवाओं के पास पूरी दुनिया की जानकारी है, मगर उस जानकारी को जीवन की
समझ मे...
1 दिन पहले
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (27-08-2016) को "नाम कृष्ण का" (चर्चा अंक-2447) पर भी होगी।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'