असली ताकत ऊँची आवाज़, रौब या दिखावे में नहीं, बल्कि..
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कभी-कभी इंसान को जरूरत से ज्यादा महत्व और तारीफ मिलने लगे तो वह अपनी असली
हैसियत भूलकर खुद को दूसरों से बड़ा समझने लगता है। यही कारण है कि हर किसी को
खु...
3 दिन पहले
समाज में जो होता है अधिकतर लेखन उसी पर आधारित होता है कल्पना के पंख लेखन में और जान दाल देते हैं |
जवाब देंहटाएंआशा
सही कहा आशा जी...धन्यवाद.....
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