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शुक्रवार, 18 जनवरी 2013

नहीं रुकेंगे बलात्कार... डा श्याम गुप्त

                                  

         
 
          क्योंकि हमारे समाचार-पत्र, पत्रकार, ट्रेवेल एजेंसी  तो हमें- हमारे नव-युवाओं-युवतियों, देश के भावी कर्णधारों को  मौज-मस्ती के लिए ..शराव - शबाव में मस्त रहने को ही पर्यटन बता रहे हैं ..सिखा-पढ़ा रहे हैं | देखें चित्रों में ...
     जबकि हमारे देश भर के तमाम विद्वान्, शंकराचार्य जैसे विश्व-मान्य संत-विद्वान्  एवं हाल ही में तमाम, संतो-साधुओं-आचार्यों-विद्वानों –अनुभवी जन-नेताओं, साहित्यकारों  आदि ने अप-संस्कृति एवं आचरण के विभिन्न बिन्दुओं पर विचार व्यक्त किये हैं, जिन पर आधुनिकता से संचारित तमाम युवाओं ने आपत्ति भी की है |

        हमें सोचना होगा कि ये तमाम विज्ञ व अनुभवी मान्य जनों  के  विचार आदि सही हैं या आपत्ति करने वाले कम-उम्र अनुभव व ज्ञान वाले युवा  जिन्हें अभी बहुत कुछ सीखना है और ये पत्र-पत्रिकाएं, पत्रकार, ट्रेवेल एजेंट आदि धंधेबाज संस्थाएं|





         ठीक है संत-समाज, नेताओं , अनुभवी लोगों में भी हाल में ही तमाम कदाचार देखे-सुने गए हैं ..जिससे युवा व बच्चों में अनास्था, अश्रृद्धा व मति-भ्रम उत्पन्न होता है | निश्चय ही उन्हें अपना आचरण सुधारना होगा | परन्तु यह भी सत्य है कि यह तो अमेरिका जैसे देश में भी राष्ट्रपति स्तर तक के तमाम लोग अनाचरण व कदाचार में लिप्त पाए हैं | तो हम क्यों स्व-संस्कृति त्यागकर पाश्चात्य –संस्कृति अपनाएं व उस पर चलें |

               परन्तु इस से सांकृतिक मूल्य, आचरण-अनाचरण, स्वसंस्कृति अनुसार 

आचार-व्यवहार की  स्वीकार्यता, विदेशी एवं अप-संस्कृति की अस्वीकार्यता को अस्वीकार  

नहीं किया जा सकता |    
  
              
 
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