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रविवार, 1 अप्रैल 2012

श्री राम ...बाल गीत ....डा श्याम गुप्त

धनुष वाण काँधे पर धारे,
मोहक कोमल श्यामल छवि ।
रघुपति राघव नीति विधायक ,
कुल देवता तेजमय रवि ।।

दशरथ नंदन, कौशल्या सुत,
गले में वैजयंती माला ।
जनक नंदिनी के स्वयंबर में,
शिव का धनुष तोड़ डाला ।।

नील कमल सम शोभित लोचन,
रघुकुल तिलक कहे जाते ।
बच्चो! ये भगवान राम हैं,
राजा राम भी कहलाते ।

वन अंचल को दुष्ट जनों से,
निर्भय करने की ठानी ।
वन वन घूमे कष्ट सहे नित,
हार नहीं लेकिन मानी ।

सीता हरण किया रावण ने ,
निज अभिमान दिखाया था ।
कुल के सहित नाश करने हित,
सागर-सेतु बनाया था ।

दक्षिण सागर तट पर शिव का ,
ज्योतिर्लिंग सजाया था ।
इसीलिये वह पावन स्थल,
रामेश्वरम कहाया था ।।




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