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शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2012

श्याम स्मृति.....खाली पेट नहीं रहा होगा .. ड़ा श्याम गुप्त ..



श्याम स्मृति-----
               मैं यह नहीं कहूँगा कि हमारे पुरखों ने वायुयान बना लिए थे, वे भी ऊपर के लोकों को जा चुके थे, आज के नवीन अस्त्र-शस्त्र  भी उनके समय में थे | परन्तु पुष्पक विमान से उड़ाने की कल्पना कर सकने वाला समाज निश्चय ही खाली पेट नहीं रहा होगा ...रोटी, कपड़ा और मकान की समस्या हल कर चुका होगा |

सोमवार, 28 मई 2012

शिशु गीत ...मुझको रोना आजाता है ...डा श्याम गुप्त ...

कृपा दृष्टि ईश्वर की आशीर्वाद बड़ों का ,
संचित पुण्य-प्रताप, कामना से पुरखों की |
पुत्र रत्न से  अपना यह आँगन महकाया ,
शुभेच्छा  ने आप सभी श्री-गुणी जनों की ||


बावा-दादी, नाना-नानी,बुआ, मौसी,
चाचा, मामा , ताई सबके राज दुलारे |
रखा गया है आज नाम इन चिरंजीव का,
हम वर्णन करते हैं उनके प्रिय गुण सारे ||


जब कोई  भी नाम से उनके, उन्हें पुकारे ,
चंचल चपल चतुर नयनों से उन्हें निहारे |
बाव्वा, वाप्पा, बू उऊ... संगीत सुनाएँ ,
यही  चाहते सदा रहें सब निकट हमारे ||


पापा  घर आते  ऊ ऊ, आ आ,  एं एं से ,
करें शिकायत हाथ पैर को पटक पटक कर |
मम्मी ने जबरन दुद्धू था मुझे पिलाया,
आज  नहीं दादी ने केला मुझे खिलाया ||


बावा नीचे आज लेगये मुझे घुमाने ,
मैं दिन भर हंस-हंस गाता हूँ विविध तराने |
मेरी  भाषा कोई  समझ नहीं पाता  है,
इसीलिये  बस मुझको रोना आजाता है ||









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