कामना कभी भी सुखी,प्रसन्न और हसने नही देती ||
समझो,जो कुछ परमात्मा ने दिया है |
बहुत दिया है,जरुरत से ज्यादा दिया है ||
कही तो ठहरना होगा ,कही तो रुकना होगा |
कही तो "बस" कहना होगा ||
संतोष करके तो देखो ,जीवन धन्य हो जायेगा |
जीवन में संतोष रखने वाले हमेशा सुखी रहते है ||
संतोष का फल हमेसा मीठा होता है |
धन्यवाद् का स्वर भी उठने दो ||
त्रप्ति की बंशी भी बजने दो ,कभी हंसो भी तो |
संतोष रखने से मन को परम शांति मिलाती है ||
रचना भेजने वाले {संकलनकर्ता}
श्री दिनेश सिंह राजपुरोहित भिंडाकुआ
Dinesh raj purohit <rajpurohitdinesh60@gmail.com>
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