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रविवार, 5 अगस्त 2012

औरत के रूप


ये आर्टिकल मैंने अपने ब्लॉग मोहब्बत नामा के लिए लिख कर पोस्ट किया था.और ये मेरे लिखे मकबूल आर्टिकल्स में से एक है.जिसे अवाम में काफी पसंद किया था.और एक और याद इस आर्टिकल से जुडी हुई है वो ये की यही आर्टिकल मैंने उर्दू की एक मैगजीन के लिए पोस्ट किया था जिसके बाद मुझे ''बेस्ट कॉलम निगार '' का इनाम और लकब मिला था.आज एक ब्लॉग सबका के जरिये इसे शेयर कर रहा हूँ.

आज सेकड़ों घरों में अमन नही है.आये दिन लड़ाई झगडे बेसुकुनी ,तरह तरह की सियासतें ,इन सबकी एक ख़ास वजह है सास बहु के झगडे.
आज फिल्मो और सास बहु के नाटकों को देख देख कर घर की औरतों की कैसी तरबियत हो रही है ये बात वही समझ सकते हैं जिनके घरों में एक तरफ उनको उनकी माँ खींचती है तो दूसरी तरफ उनकी बीवी.बीवी की माने तो जोरू का गुलाम ,और माँ की माने तो जालिम,और माँ का पिट्टू.बिचारा मर्द जो इनके बिच पिस्ता रहता है ,वो भी सोचता है की आखिर इन दोनों को समझाए कैसे ? क्यों की सास बहु के सीरियल्स को देख देख कर के इनका मिजाज एक दुसरे के खिलाफ हो गया है.बीवी भी तो औरत है और माँ भी तो औरत है ,ये औरत के दो अलग अलग रूप क्यों और कैसे हो गये ? आज हम इस बारे में कुछ समझेंगे.
औरत : ये वो मकाम है की अगर बेटी के रूप में हो तो बाप के लिए नन्ही सी कली ,और सबसे लाडली ,जिसकी छोटी छोटी सी शरारतें जिन्दगी में उजाला कर देती हैं.जिसे देख कर ही प्यार आता है.जो दुसरे की अमानत बनकर अपनी पूरी जिन्दगी गुजार देती है.जो अपनी अच्छाइयों से अपने माँ बाप का नाम रोशन करती है.जो अपने माँ बाप की सेवा करती है.


औरत : अगर बीवी के रूप में हो तो शौहर की आँखों की ठंडक.जिसकी एक मुस्कान से सारे दर्द दूर हो जाएँ.जो दुःख सुख में सबसे ज्यादा साथ देती है.जो इन्सान की जिन्दगी को मोहब्बतों से भर देती है.उसे आगे बढ़ने का होंसला देती है.उसके घर और उसके बच्चों को संभालती है.जिन्दगी भर उसका साथ निभाती है.उसकी तंगी और गरीबी को अपने दामन में छुपा लेती है.उसके माल को फुजूल बर्बाद होने से बचाती है.उसके माल की ,औलाद की ,इज्जत आबरू की हिफाज़त करती है.


औरत : अगर माँ के रूप में हो तो ममता से भरी जन्नत.जिसके प्यार से सर पे हाथ फेरने से ही सारे गम ख़त्म हो जाएँ.जिसका मकाम दुनिया में औलाद के लिए सबसे बड़ा.जो बिना किसी स्वार्थ के अपने बच्चों से प्यार करती है.
दुःख तकलीफ उठाकर अपने बच्चों की परवरिश करती है.माँ औलाद का सबसे पहला स्कुल ,जहाँ से अच्छी  तालीम हासिल करने वाले लोग बड़े इन्सान बनते हैं.माँ जो अपने बच्चों का भविष्य संवारती है.माँ जो उन्हें बुराई से बचाती है.माँ जो दुःख सुख में अपनी औलाद का होंसला बढाती है.माँ जिसके नाम से ही सारे गम और तकलीफें दूर हो जाते हैं.माँ जो दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करने वाली हस्ती है.जिसके कदमो तले जन्नत है.दुनिया में इससे ज्यादा महान कोई नही.


औरत : यही औरत जब सास बनती है तो इसको पता नही क्या हो जाता है ,ये सोचती है की इस बहु के आने से मेरा बेटा जो मेरा था अब अपनी बीवी का हो गया.तरह तरह से ये घर में टेंशन पैदा कर देती है.ये क्यूँ चाहने लगती है की मेरा बेटा अपनी बीवी को डांटे.ये क्यों चाहती है की मेरा बेटा मेरी साइड ले ,और जैसा मै कहूँ अच्छा कहूँ या बुरा कहूँ ये माने,ख़ास कर ये अपनी बीवी को मै जैसा चाहूँ वैसा रखे.सभी सास इस तरह की नही होती मै जनरल बात कर रहा हूँ की इस तरह की भी बहुत ज्यादा होती हैं.कई बार बहु गलत होती है और सास मजलूम.लेकिन कई बार सास गलत होती है और बहु मजलूम.
इस वजह से जो घर में फसाद पैदा होते हैं,उनकी कोई मिसाल नही.बिचारा मर्द सुबहो शाम इस वजह से बहुत ज्यादा टेंशन में रहता है.
सास बहु के इन झगड़ों का हल सिर्फ और सिर्फ यही है की सास बहु को अपनी बेटी की जगह समझे,और बहु अपनी सास को अपनी माँ की जगह समझे.क्यों की माँ की बात ,या डांट डपट से बेटी नाराज़ नही होती.और बेटी की छोटी छोटी बातों से माँ नाराज़ नही होती.बेटी कभी कभी बद कलामी भी कर देती है लेकिन माँ उसे बर्दाश्त कर लेती है ,मगर यही बात अगर बहु करे तो वो गुस्से से लाल पिली हो जाती है.जब ये दोनों अपने रिश्ते को गहराई से लेंगी तो घर अमन का गहवारा बन जायेगा.झगडे फसाद सब ख़त्म हो जायेंगे.काश की सब औरतें इन बातों को समझें.


''आपको ये पोस्ट कैसी लगी ? अपनी राय निचे कमेन्ट बॉक्स में जरुर दें.
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                                               कलम : ''आमिर दुबई.,,

10 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ख़ूब!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 06-08-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-963 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  2. आर्टिकल तो आपका अच्छा है पर सास पर ही सारा दोष थोप दिया आपने तो । ताली एक हाथ से नही ना बजती ।
    एक और बात सास में पोस्ट मीनोपॉजल बदलावों के वजह से डॉमिनन्स बढ जाता है । वजह एस्ट्रोजन की कमी और टेस्टोसीऱन की वृध्दी हो सकती है । ये मेरा अपना मत है इस पर शोध होना चाहिये ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. शायद आपने आर्टिकल सही पढ़ा नही ,या पढ़कर उसको समझा नही.आप इस लाइन पर गौर करें.''सभी सास इस तरह की नही होती मै जनरल बात कर रहा हूँ की इस तरह की भी बहुत ज्यादा होती हैं.कई बार बहु गलत होती है और सास मजलूम.लेकिन कई बार सास गलत होती है और बहु मजलूम.

      हटाएं
  3. नारी का पुत्री जनम, सहज सरलतम सोझ |
    सज्जन रक्षे भ्रूण को, दुर्जन मारे खोज ||

    नारी बहना बने जो, हो दूजी संतान
    होवे दुल्हन जब मिटे, दाहिज का व्यवधान ||

    नारी का है श्रेष्ठतम, ममतामय अहसास |
    बच्चा पोसे गर्भ में, काया महक सुबास ||

    जवाब देंहटाएं
  4. एक सामान्य सी बात .... एकांगी दृष्टि ... अभी गहन अध्ययन व मनन की आवश्यकता है...

    जवाब देंहटाएं

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