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    2 माह पहले

बुधवार, 22 मई 2013


यह रचना गजल नही है क्यों की गजल की एक निश्चित बहर होती है बहर उर्दू का छंद  है और गजल का एक अपना व्याकरण जिसे रूज़ कहते हैं वह भी जरूरी है तथा उस में वर्ण की गणना  का भी नियम देवनागरी वर्ण की गणना  से भिन्न है । हिंदी में गीत की परम्परा बहुत  पुरानी  है उसी क्रम  में यह नव गीतिका है । आप के विचार इस पर सदर आमंत्रित हैं । 

नव गीतिका 
यह रचना गजल नही है 
रौशनी कैद है और परेशान  है 
अब जमाने की ये ही तो पहचान है । 
हाँ मैं हाँ बस  करो और कुछ न कहो 
फिर तो सब से  भले आप  इन्सान हैं। 
भूल कर भी उठाया यदि प्रश्न तो 
आप इन्सान कब आप हैवान हैं । 
भूल जाओ यहाँ सच बड़ी चीज है 
संच कहने से मिलता नही मान है ।
आँख भी बंद हो , कान मुंह बंद हो 
फिर तो बन जाओगे आप परधान है। 
झूठ ही तुम कहो जोर से पर कहो 
मान लेंगे उसे लोग सच बात है ।
इस जमाने का कैसा ये दस्तूर है 
पूजते हैं उसे जो की बदमाश है । 
आप बच्चों के जैसे न बातें करें 
जिस से पूरा हो स्वारथ वो भगवान है । 
इस जमाने से कैसे लड़ोगे भला 
सांच अब न यहाँ  कोई हथियार है ।।   
डॉ वेद व्यथित 
09868842688 

9 टिप्‍पणियां:

  1. ---मेरे विचार व अंदाज़ से यह ग़ज़ल ही है ...हाँ कहीं कहीं फिसलती हुई ....इसमें है रदीफ़ है एवं मात्रा'अ' का काफिया है .. ----हथियार..बदमाश.. सचबात...में यद्यपि अन्य काफिया से समान्तता नहीं है(...वान, शान , चान = आन) परन्तु मात्रा अ का काफिया दुरुस्त है |

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    1. yh rchna meri hai aur main ise gjl nhi kh rha hoon yh nv gitika hi hai jo ek vidha ke roop me sthapit ho rhi hai mdhy prdesh se is ki shruaat hui hai aur ab is pr ek bhut bdi kary shala hone ja rhi hai is liye mera nivedn hai ki ise jbrdsti gzl n bnaya aye

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    2. कुछ भी कहते रहें यह है ग़ज़ल ही.....गीतिका कहाँ है जो यह नव-गीतिका आगई....

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    3. yh aap ke kahne se gzl nhi ho gai ydi gzl hai to aap is ki bahr btayen aur kahaan se aati yh aa gai hai dekh lo aur is ka ek bhut bda aandoln khda ho rha hai desh me kyon ki is hindi ka bhi koi parmprik chhnd nhi hai is liye yh giitka nhi nv gitika hai

      हटाएं

    4. श्रीमान..कही हुई तो आपकी ही रहेगी...आपकी रचना है, आप चाहे जो नाम दें ...मेरी बहर तो यह है...
      न बहर से न वज्न से ग़ज़ल गुलज़ार होती है |
      कहने का अंदाज़ जुदा हो, बहरे बहार होती है |
      गज़ल तो इक अंदाज़े-बयाँ है दोस्त,
      श्याम तो जो कहदें, गज़ले-बहार होती है |


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  2. ---जिसे रूज़ कहते हैं ... मेरे विचार से यह शब्द अरूज़ है...

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  3. -----यह नव-गीतिका इसलिए नहीं है कि इसके पदों में गीत की भाँति विषय एक्यता नहीं है अपितु ग़ज़ल के शेरों की तरह विषय भिन्नता है ...यह हिन्दी गजल है ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल शुक्रवार (24-05-2013) के गर्मी अपने पूरे यौवन पर है...चर्चा मंच-अंकः१२५४ पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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