एक ब्लॉग सबका में आप सभी का हार्दिक सुवागत है!

आप भी इसमें शामिल हो सकते हैं!

यह ब्लॉग समर्पित है "सभी ब्लोग्गर मित्रो को"इस ब्लॉग में आपका स्वागत है और साथ ही इस ब्लॉग में दुसरे रचनाकारों के ब्लॉग से भी रचनाएँ उनकी अनुमति से लेकर यहाँ प्रकाशित की जाएँगी! और मैने सभी ब्लॉगों को एकीकृत करने का ऐसा विचार किया है ताकि आप सभी ब्लोग्गर मित्रो खोजने में सुविधा हो सके!

आप भी इसमें शामिल हो सकते हैं

तो फिर तैयार हो जाईये!

"हमारे किसी भी ब्लॉग पर आपका हमेशा स्वागत है!"



यहाँ प्रतिदिन पधारे

शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

नव गीतिका

नव गीतिका

किसी घायल परिंदे को नजर अंदाज मत करना
किसी की जिन्दगी से इस तरह खिलवाड़ मत करना |
कहीं कोई तुम्हें गम जिन्दगी का खुद सुनाये तो
जरा दिल से उसे सुनना ,कभी इंकार मत करना |
तुम्हें चाहे कोई देना कभी आँखों के दो आँसू
उन्हें लेना वो स्वाति बूँद हैं इंकार मत करना |
कोई प्यासा कभी दो बूँद पानी मांग ले तुम से
उसे जी भर पला देना कभी इंकार मत करना
जहाँ भी शाम हो जाये यदि दे आसरा कोई
उसे स्वीकार कर लेना कभी इंकार मत करना ||

31 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर...
    कहीं कोई तुम्हें गम जिन्दगी का खुद सुनाये तो
    जरा दिल से उसे सुनना ,कभी इंकार मत करना |...

    विद्या http://vidyawritesagain.blogspot.in/

    जवाब देंहटाएं
  2. Bahut Hi sundar panktiyan ..

    कहीं कोई तुम्हें गम जिन्दगी का खुद सुनाये तो
    जरा दिल से उसे सुनना ,कभी इंकार मत करना |

    कोई प्यासा कभी दो बूँद पानी मांग ले तुम से
    उसे जी भर पला देना कभी इंकार मत करना

    Behtareen ...

    My Blog: Life is Just a Life
    My Blog: My Clicks
    .

    जवाब देंहटाएं
  3. ----बहुत सुन्दर गज़ल है...परन्तु नव-गीतिका कहना और भी अधिक सुन्दर है...बधाई...

    --मेरे विचार से...
    "उन्हें लेना वो स्वाति बूँद हैं इंकार मत करना |" = समझ लेना हैं बूंदें स्वाति की इन्कार मत करना।.. शायद अधिक गतिमय लग रहा है

    ---"जहाँ भी शाम हो जाये यदि दे आसरा कोई..में....= यदि( दो मात्रायें) के स्थान पर अगर( तीन मात्रायें) हो..तो शायद अधिक समुचित रहे...

    जवाब देंहटाएं
  4. उत्तर
    1. aap mere anuj hain aap ka aabhar nhi vykt kr rha hoon aap ko meri annt koti shubhkamayen
      main bich me bahr chla gya tha is karm mitron ka aabhar der se vykt kr rha hoon pr sb ka sneh mere sath rhega

      हटाएं
  5. = समझ लेना हैं बूंदें स्वाति की इन्कार मत करना।.बहुत सुन्दर|

    जवाब देंहटाएं
  6. जहाँ भी शाम हो जाये यदि दे आसरा कोई
    उसे स्वीकार कर लेना कभी इंकार मत करना ||बहुत ही गहरे और सुन्दर भावो को रचना में सजाया है आपने.....

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 06-02-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. aap ka kotish aabhar kripya aabhar swikar kren
      chrcha mnch ka apaar sneh mil rha hai chrcha mnch privar ka hridy se aabahri hoon

      हटाएं
  8. bahut achchi bhaavnayen hain in panktiyon me.ek choti si takneeki truti hai theek kar lijiye pani pila ki jagah pala likha hai use theek kar lijiye.umda rachna.

    जवाब देंहटाएं
  9. कोई प्यासा कभी दो बूँद पानी मांग ले तुम से
    उसे जी भर पला देना कभी इंकार मत करना
    bahut hi sundar ....sarthak aur kalyankari panktiyan ..sadar abhar.

    जवाब देंहटाएं
  10. तुम्हें चाहे कोई देना कभी आँखों के दो आँसू
    उन्हें लेना वो स्वाति बूँद हैं इंकार मत करना |waah....bahut achcha.

    जवाब देंहटाएं

एक ब्लॉग सबका में अपने ब्लॉग शामिल करने के लिए आप कमेन्ट के साथ ब्लॉग का यू.आर.एल.{URL} दे सकते !
नोट :- अगर आपका ब्लॉग पहले से ही यहाँ मौजूद है तो दोबारा मुझे अपने ब्लॉग का यू.आर.एल. न भेजें!

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

लिखिए अपनी भाषा में

मेरी ब्लॉग सूची