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बुधवार, 28 मार्च 2012

एक बाल गीत ...शिवजी...डा श्याम गुप्त....

नाग गले में लिपटे रहते,
चन्दा माथे पर जिनके।
जटाजूट में गंगा बहती,
है त्रिशूल कर में उनके।

नेत्र तीसरा है मस्तक पर,
नीला कंठ सुहाया है ।
कटि पर बस मृगछाला बांधे,
तन पर भष्म रमाया है ।

बच्चो! ये भोले शंकर हैं,
शिव-शंभू भी कहलाते ।
देवों के भी देव हैं इससे,
महादेव बोले जाते ।

अर्थ ये लिपटे नागों का है,
दुष्टों को बस में करते  ।
फिर भी शीतल रहे ह्रदय, वे-
चन्दा माथे पर रखते ।

जग के कष्टों का विष पीकर,
नीलकंठ बन जाते हैं ।
सत तम रज का त्रिशूल थामे,
प्रेम की गंगा बहाते हैं ।।
 
 

8 टिप्‍पणियां:

  1. जय बाबा भोले नाथ |

    सस्वर गाने की सफल कोशिश की ।

    आभार ।

    जवाब देंहटाएं
  2. धन्यवाद रविकर जी, धीरेन्द्र जी एवं हबीब साहब....जय भोले शन्कर....

    जवाब देंहटाएं
  3. नाग गले में लिपटे रहते,
    चन्दा माथे पर जिनके।
    जटाजूट में गंगा बहती,
    है त्रिशूल कर में उनके।

    बहुत सुंदर गीत, बहुत खूब लिखा है..

    जवाब देंहटाएं
  4. आदरणीय डॉ.श्याम गुप्ताजी पोस्ट करने के लिए आभार...आपका
    सवाई सिंह

    जवाब देंहटाएं

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