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    5 सप्ताह पहले

शुक्रवार, 30 मार्च 2012

बाल गीत...दुर्गा ...डा श्याम गुप्त....



भक्तों की तारिणी माँ,           
आठ  भुजा धारी है ।
कर में त्रिशूल, कमल,
खड्ग  गदा धारी है  ।

शंख चक्र  धनु बाण ,
ओउम करतल सोहे।
स्वर्ण आभूषण जटित,
धवल कांति मन मोहे ।

शैलपुत्री,  चंद्रघंटा ,
कूष्मांडा,ब्रह्मचारिणी।
स्कंदमाता, कालरात्रि,
और  कात्यायिनी ।

महागौरी,  सिद्धिदात्री,
नौ   रूप  धारी   है।
मुख पर मुस्कान मृदुल,
दुष्ट दमनकारी है ।

सृष्टि की सृजक माता,
जग पालन हारी है।
आदिशक्ति,जगदम्बे,
लाल  वस्त्र  धारी है।

दुर्गति निवारिणी माँ,
दुःख: हरण हारी है।
बच्चो ! ये दुर्गा माँ,
सिंह की सवारी है ।।


 

6 टिप्‍पणियां:

  1. वाह ! ! ! ! ! बहुत खूब श्याम जी ...
    सुंदर रचना,बेहतरीन प्रस्तुति,....

    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: तुम्हारा चेहरा,

    उत्तर देंहटाएं
  2. भक्तों की तारिणी माँ,
    आठ भुजा धारी है ।
    कर में त्रिशूल, कमल,
    खड्ग गदा धारी है ।

    शंख चक्र धनु बाण ,
    ओउम करतल सोहे।
    स्वर्ण आभूषण जटित,
    धवल कांति मन मोहे ।

    रचना वाकई तारीफ के काबिल है

    उत्तर देंहटाएं

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