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सोमवार, 10 जून 2013

क्या आप जानते हैं ...हिन्दी भाषा


-हिन्दी भाषा 'इंडो यूरोपियन' परिवार से संबंध रखती है।
- इस भाषा के उद्गम का महाद्वीप 'एशिया' व देश 'भारत' है।
- भारत देश में हिन्दी भाषा को अधिकृत रुप से उपयोग किया जाता है।
- 366,000,000 लोगों के लिए यह भाषा 'मातृभाषा' है वहीं इस भाषा को कुल 487,000,000 लोग उपयोग करते हैं।
- हिन्दी की वर्णमाला में 11 स्वर व 33 समस्वर हैं।
- हिन्दी की देवनागरी लिपि को प्राचीन ब्राह्मी से लिया गया है
- हिन्दी की ढेरों बोलियाँ है जिसमें निमाड़ी, बुंदेलखंडी, खड़ीबोली आदि शामिल है।
- 80 हिन्दी स्कूल अमेरिका मे और 95 हिन्दी स्कूल कनाडा में हैं ।
- 24 विश्वविद्यालय मौरीशस में हैं ।
- लगभग ९५ हिन्दी शिक्षण संस्थायें औस्ट्रेलिया मे हैं ।
- वर्तमान में हिन्दी साउथ एशिया (भारत, पाकिस्तान, नेपाल व भूटान), साउथ अफ्रीका, मॉरीशस, यूएसए, कनाडा, फिजी, युगांडा, गुएना, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, न्यूजीलेंड, सिंगापुर जैसे देशों में भी व्यापक स्तर पर बोली जा रही है।

आओ हम सब अपनी हिन्दी का मान बढायें ।
इस हिन्दी रूपी सूत्र में बंध कर एक हो जायें ।
और अपनी हिन्दी को विश्व मंच पर सम्मान दिलायें ।

आज सिर्फ हम कह रहे हैं, पर हम प्रयास करेंगे तो एक दिन पूरी दुनिया कहेगी जो बात हिन्दी में है, वो किसी और में नहीं ।

जय हिन्द । 

18 टिप्‍पणियां:

  1. आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी यह विशेष रचना को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज (सोमवार, १० जून, २०१३) के ब्लॉग बुलेटिन - दूरदर्शी पर स्थान दिया है | बहुत बहुत बधाई |

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    1. आदरणीय तुषार राज रस्तोगी जी मेरी पोस्ट "क्या आप जानते हैं ...हिन्दी भाषा" को शामिल करने के लिए हार्दिक आभार आपका

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार (11-06-2013) के "चलता जब मैं थक जाता हुँ" (चर्चा मंच-अंकः1272) पर भी होगी!
    सादर...!
    शायद बहन राजेश कुमारी जी व्यस्त होंगी इसलिए मंगलवार की चर्चा मैंने ही लगाई है।
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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    1. आदरणीय डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी मेरी पोस्ट "क्या आप जानते हैं ...हिन्दी भाषा" को शामिल करने के लिए हार्दिक आभार आपका

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  3. सुन्दर प्रस्तुतीकरण आज भाषा को अलग अलग रूपमें परिवर्तित किया जा रहा है जिससे भाषा की अपनी बुनियाद पर असर पड़ सकता है इससे सुरक्षित रखने का रास्ता भी अख्तियार करना चाहिए

    उत्तर देंहटाएं
  4. राष्ट्रपति से लगायी भाषा आंदोलन ने देश को अंग्रेजी से गुलामी से मुक्ति की गुहार

    अंग्रेजी की गुलामी से मुक्ति के खिलाफ निर्णायक संघर्ष मे संसद की चैखट जंतर मंतर पर चल रहे भाषा आंदोलन में सम्मलित हो राष्ट्रभक्त

    नई दिल्ली।
    भारतीय भाषा आंदोलन ने देश की जनता से अंग्रेजी गुलामी से मुक्त होने के लिए भारतीय भाषा आंदोलन को समर्थन देने का खुला आवाहन किया। वहीं दूसरी तरफ भाषा आंदोलन ने आजादी के 65 साल बाद भी अंग्रेजी भाषा की गुलामी में जकडे भारत को मुक्त करने के लिए राष्ट्रपति से भी सर्वोच्च न्यायालय व संघ लोकसेवा आयोग से अंग्रेजी की अनिवार्यता को अविलम्ब हटाने व भारतीय भाषाओं को लागू करने की मांग की। 1988 से संघ लोकसेवा आयोग के समक्ष अंग्रेजी की अनिवार्यता के खिलाफ 14 सालों तक ऐतिहासिक संघर्ष करने वाला ’भारतीय भाषा आंदोलन ’अब अंग्रेजी दासता से मुक्ति व भारतीय भाषाओं के सम्मान के लिए संसद की चैखट, राष्ट्रीय धरना स्थल पर 21 अप्रैल से निरंतर धरना दे रहा है। राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में आजादी के 65 साल बाद भी देश में बलात अंग्रेजी की गुलामी थोपे रखने पर गहरा क्षोभ प्रकट किया।
    भारतीय भाषा आंदोलन के धरना स्थल जंतर मंतर पर इसी मांग को चल रहे आंदोलन को तेज करने के लिए 8 जून की देर सांयकाल एक सभा का आयोजन किया गया। भाषा आंदोलन के पुरोधा पुष्पेन्द्र चोहान की सरपरस्ती में चली इस बैठक की अध्यक्षता भाषा आंदोलन के महासचिव देवसिंह रावत ने किया। इस बैठक में गहरा क्षोभ प्रकट किया कि विश्व के चीन, जापान, जर्मनी, रूस, इटली, फ्रांस, इंडोनेशिया, टर्की व इस्राइल सहित तमाम विकसित व स्वाभिमानी देश जहां अपनी भाषाओं में विकास व लोकशाही का पताका फेहरा रहे है, वहीं विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति व विश्व में अंग्रेजी से अधिक संख्या में बोली जाने वाली हिन्दी, तमिल, तेलगू आदि भारतीय भाषाओं की शर्मनाक उपेक्षा का दंश अपने ही देश में अंग्रेजी की गुलामी का दंश झेलना पड रहा है।
    देश के स्वाभिमान व लोकशाही की रक्षा के लिए देश का पूरा शासन प्रशासन देश की भाषा में हो न की अंग्रेजी भाषा में। देश को भले ही अंग्रेजो ंसे मुक्ति 15 अगस्त 1947 को मिल गयी हो परन्तु हो परन्तु आज 65 साल बाद भी देश के हुक्मरानों ने देश को अंग्रेजी भाषा का गुलाम बना रखा है। देश की लोकशाही को कार्यपालिका, न्यायपालिका व विधायिका में अंग्रेजी की गुलामी थोपे रख कर न केवल आजादी के महान शहीदों व स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों का घोर अपमान किया जा रहा है अपितु देश की आजादी को बंधक बना दिया गया है। इस बैठक में भाषा आंदोलन के पुरोधा पुष्पेन्द्र चैहान, महासचिव देवसिंह रावत, देवेन्द्र भगत जी, अनिल यादव, अशोक यादव, राष्ट्रवादी कवि राजेन्द्र नटखट, श्याम जी भट्ट, सतीश मुखिया, नवीन सोलंकी, , सरदार महेन्द्रसिंह,,चन्द्रवीर सिंह, अखिलेश गौड़, जगदीश भट्ट, विजय गौतम, हुकम सिंह कण्डारी,पत्रकार अभिनव कलूड़ा, किशन आर्य, संजय कुमार, मोनू कुमार, बाबू लाल राजपूत, किशोरी लाल, प्रेम सुन्दरियाल, विकास कुमार, अरविन्द भारत, खेमचंद शर्मा, व श्री पाण्डे सहित अनैक देशभक्त इस बैठक में सम्मलित हुए।

    भारतीय भाषा आंदोलन

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  5. बहुत अच्छा लगा यह ब्लॉग देखकर ,बहुत ही सराहणीय कार्य है |
    http://srishtiekkalpana.blogspot.in

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  6. आपका ब्लॉग बहुत उपयोगी साबित होगा |
    aadhuniksahitya@gmail.com

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  7. मेरा ब्लॉग शामिल करें :-
    देहात :- http://dehatrkj.blogspot.com

    यूँ ही कभी :- http://yunhiikabhi.blogspot.com

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