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    5 सप्ताह पहले

सोमवार, 28 मई 2012

शिशु गीत ...मुझको रोना आजाता है ...डा श्याम गुप्त ...

कृपा दृष्टि ईश्वर की आशीर्वाद बड़ों का ,
संचित पुण्य-प्रताप, कामना से पुरखों की |
पुत्र रत्न से  अपना यह आँगन महकाया ,
शुभेच्छा  ने आप सभी श्री-गुणी जनों की ||


बावा-दादी, नाना-नानी,बुआ, मौसी,
चाचा, मामा , ताई सबके राज दुलारे |
रखा गया है आज नाम इन चिरंजीव का,
हम वर्णन करते हैं उनके प्रिय गुण सारे ||


जब कोई  भी नाम से उनके, उन्हें पुकारे ,
चंचल चपल चतुर नयनों से उन्हें निहारे |
बाव्वा, वाप्पा, बू उऊ... संगीत सुनाएँ ,
यही  चाहते सदा रहें सब निकट हमारे ||


पापा  घर आते  ऊ ऊ, आ आ,  एं एं से ,
करें शिकायत हाथ पैर को पटक पटक कर |
मम्मी ने जबरन दुद्धू था मुझे पिलाया,
आज  नहीं दादी ने केला मुझे खिलाया ||


बावा नीचे आज लेगये मुझे घुमाने ,
मैं दिन भर हंस-हंस गाता हूँ विविध तराने |
मेरी  भाषा कोई  समझ नहीं पाता  है,
इसीलिये  बस मुझको रोना आजाता है ||









6 टिप्‍पणियां:

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