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    5 दिन पहले

मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

प्यास



प्यास
प्यास बहुत बलवती प्यास ने कितने ही सागर सोखे
प्यास नही बुझ सकी प्यास बुझने के हैं सारे धोखे
प्यास यदि बुझ गई तो समझो आग भी खुद बुझ जाएगी
प्यास को समझो आग ,आग ही रही प्यास को है रोके ||
प्यास बुझी तो सब कुछ अपने आप यहाँ बुझ आयेगा
यहाँ चमकती दुनिया में केवल अँधियारा छाएगा
इसीलिए मैंने अपनी इस प्यास को बुझने से रोका
प्यास बुझी तो दिल भी अपनी धडकन रोक न आयेगा
लगता है प्यासों को पानी पिला पिला कर क्या होगा
पानी पीने से प्यासे की प्यास का तो कुछ न होगा
प्यास कहाँ बुझ पाती है बेशक सारा सागर पी लो
सागर के पानी से प्यासी प्यास का तो कुछ न होगा
कितनी प्यास बुझा लोगे तुम बेशक कितने घट पी लो
कितनी प्यास और उभरेगी बेशक इसे और जी लो
जब तक प्यास को बिन पानी के प्यासा ही न मारोगे
तब तक प्यास कहाँ बुझ सकती बेशक तुम कुछ भी पी लो
आभार सहित
वेद व्यथित
अनुकम्पा -१५७७ सेक्टर ३
फरीदाबाद १२१००४

17 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया.................
    प्यास बुझी तो सब कुछ अपने आप यहाँ बुझ आयेगा
    यहाँ चमकती दुनिया में केवल अँधियारा छाएगा


    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  2. हुत बढ़िया रचना,सुंदर अभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  3. उत्तर
    1. bndhuvr aap nirntr smvad bnaye huye hain mere hridy kii gahraiyon me yh bhut gahrai tk smaa gya hai kripya hardik aabhar swikar kren

      हटाएं
  4. इस पोस्ट ने प्यास को सरस बना दिया ! सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. bndhuvr yh aap kii shridyta hi hai jo aap ne is pyas ko srsta se grhn kiya hai
      bhut 2 hardik aabhar vykt krta hoon kripya swikar krn

      हटाएं
  5. वाह बहुत उपयोगी प्रस्तुति!
    अब शायद 3-4 दिन किसी भी ब्लॉग पर आना न हो पाये!
    उत्तराखण्ड सरकार में दायित्व पाने के लिए भाग-दौड़ में लगा हूँ!
    बृहस्पतिवार-शुक्रवार को दिल्ली में ही रहूँगा!

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. aap ka dridy se aabhar vykt krta hoon dehli me hain to faridabad bhi drshn den
      nikt hi hai 1577 sector 3 ballabhgarh , faridabad .121004
      09868842688

      हटाएं
  6. --प्यास हो( होनी ही चाहिये) तो अवश्य बुझाना चाहिये... कैसे..

    प्यास बुझाना हो अगर, सच्चे मन की प्यास।
    करो कर्म सत्कर्म सब,रख प्रभु पर विश्वास ।।---

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. bndhu yh pyas vhi pyas hai aur yh sahity hai updesh nhi hai prntu yhi sb us me dvnit huaa hai smbhvt aap ne rchna ko dhyan se nhi pdha hai aur prmatma to hr swash ka chintn hai aur yh chint hi to pyas hai
      aabhar

      हटाएं
    2. ---दोस्त...साहित्य बिना अर्थ के नहीं होता...साहित्य में कोई कथ्य..बिना किसी वक्तव्य-दर्शन-उपदेश के नहीं होता... न होना चाहिये...अन्यथा वह साहित्य नहीं है... हर शब्द कथ्य का तत्वार्थ होता है जो भाव को उद्भाषित करता है....
      ---चिन्तन प्यास नहीं होती... प्यास से चिन्तन उत्पन्न होता है...चिन्तन से परमात्मा ...तो क्या प्यास अन्तिम स्वांस के साथ बुझेगी ...?
      --- तत्व-ग्यान को और उभारो, हो भगवन्लय, श्याम।
      जन्म जन्म की प्यास मिटे औ,मिल जायेंगे राम ॥
      --वैसे कविता का कला-पक्ष भी अपुष्ट है...

      हटाएं
    3. jis ki pyas bujh gai ho vh bk 2 nhi krta yhan sb ko bhashn dene kii bimari lgi hoti hai jo shbd ke dhvynarth ko nhi jane use kvita pdhne aur bhashn dene ka adhikar kya hai jo chint me lin hai to use baki baton se kya lena dena shesh rh gya st krk swym miye jate hai doosron ko bhash me nhi btaye jate aur abhi koi doosra gandhi ya hrsh chndr is desh me paida nhi huaa hau desh intjar kr rha hai yh kvita hai dhpoor shnkhi ktha nhi hai ydi ttv ki bat hai to ttv ke apne 2 arth hain iishvr ke apne 2 prtik hai bhagvt ktha ke nam pr jo nach nchaya ja rha hai vh desh ke vinash kii jd hai raja jis ktha ko sun kr snyasi ho gya usu ktha ko shyam bhkt banch 2 kr akoot smptti lootne lge hai ktham me mnornjn khan se aa gya jo ho rha hai shukdev ji ke sath kaun se dholk vale the
      aur jhan tk kla pksh kii aspstta kibat hai to n to maine poochha hai aur ydi yhi bat thi to ise poorv mt me vykt krna chahiye tha jo irshya vsh bad me kiya hai maine khan khan hai kimain kvi hoon aur hai to hai aap ko kya dikkt ho rhi hai prmatma ka nam aaj bhut se dhaungi bdi shan se le rhe hain ve hi jyada prmatma 2 pukarte hain jb kishudh achrn krne vale ko to prmatma khu pukarte hai aur bhkt bto n to kisi ke dosh dekhta hai aur n hi kisi ki prshnsa krta hai aur n hi kisi ki prshnsha se prsnn hota hai auraap dono kam kr rhe hain pr bhkti kaupdesh bhi sath 2 kr rhe hain yhi to kliyug hai bndhu

      हटाएं
    4. यार, पहले कथा को हिन्दी में तो लिखो साहित्य के बारे में बाद में बात करना...अन्ग्रेजी में आधी अधूरी बात ही कह कर पाओगे...बस ध्वन्यार्थ ही समझते रह जाओगे...तत्वार्थ नहीं...
      ---साहित्य में साथ २..नहीं लिखा जाता साथ-साथ लिखा जाता है...

      हटाएं
  7. उत्तर
    1. bndhu vr aap ka aabhar vykt krta hoon mood khrab hai aap ke blog pr kuchh bgla bhkt aa gye hain ho skta hai mujhe jana pde

      हटाएं
    2. भला ग्यान चर्चा में भय कैसा...पलायन क्यों...? फ़िर ब्लोग पर लिखना ही व्यर्थ है...

      हटाएं

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