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शनिवार, 21 जुलाई 2012

बाल गीत...वेद उपनिषद पुराण.....डा श्याम गुप्त....

वेद उपनिषद औ पुराण सब, 
बच्चो ! शास्त्र  हमारे |
सब जग से प्राचीन, ज्ञान के-
ये  भण्डार हैं न्यारे |


नीति धर्म व्यवहार व दर्शन,
बहु-विधि ज्ञान-विज्ञान |
ज्ञान-रूप जितने हैं होते,
सबका यहाँ विधान |


जग में जो कुछ ज्ञान कहीं है,
वह वेदों में समाया |
वेदों में जो नहीं मिला  है,
जग  में कहीं न पाया |


चार वेद हैं आदि-शास्त्र, बस-
सब उनकी शाखाएं |
ब्रह्मा  जी के चार मुखों से ,
निकले, तुम्हें बताएं |


ऋक यजु साम अथर्व वेद हैं,
चारों वेद के नाम |
इनपर चलाकर हुआ जगद्गुरु ,
भारत अपना महान ||





4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब||
    बहुत ही बेहतरीन रचना:-)

    उत्तर देंहटाएं
  2. वेद उपनिषद औ पुराण सब,
    बच्चो ! शास्त्र हमारे |
    सब जग से प्राचीन, ज्ञान के-
    ये भण्डार हैं न्यारे |
    सुंदर भाव बेहतरीन रचना..सुंदर अभिव्यक्ति.

    उत्तर देंहटाएं
  3. एक जरूरी कविता बच्चों के लिये !
    बहुत सुंदर !

    उत्तर देंहटाएं

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